कल दोपहर के समय जब ताऊ का फोन आया तो उन्ही से पता चला कि अपने राज भाटिया जी इण्डिया आए हुए हैं। क्यों कि कुछ दिनों पहले उनकी माता जी का देहान्त हो चुका है और वो आज ही उनकी अस्थियों को व्यास नदी में विसर्जित करने के लिए अमृ्तसर के लिए निकल चुके हैं। जब भाटिया जी को फोन लगाया तो पता चला कि वो कुछ ही देर में लुधियाना पहुँचने वाले हैं। बस तुरत फुरत में उनसे कुछ पलों के लिए रास्ते में ही मिलना हो पाया,क्यों कि हिन्दु मान्यताओं के अनुसार अस्थियाँ विसर्जित करने के लिए जाते समय रास्ते में कहीं ठहराव नहीं किया जाता। इसलिए घर न आ पाने की उनकी इस विवशता को समझते हुए बीच रास्ते में ही मुलाकात हो पाई। ब्लाग के माध्यम से लगभग पिछले एक वर्ष से जब से उनसे परिचय हुआ है,मैने उनसे एक बडा आत्मीय सा रिश्ता अनुभव किया है। मेरे मन में उनके प्रति जो एक छवि निर्मित हो चुकी थी,मिलने पर उन्हे बिल्कुल हूबहू वैसा ही पाया। बेहद मिलनसार,भले एवं सज्जन व्यक्ति।।
उनसे मिलने की मन में एक इच्छा तो थी,लेकिन मुलाकात इस प्रकार से ऎसे दुखद मौके पर होगी,इस प्रकार की आशा नहीं की थी।
ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वो उनकी माता जी की आत्मा को शान्ती प्रदान करे और उनके परिवार को इस दुख की घडी में साहस प्रदान करे।

