सुना है! कल 15 अगस्त नाम का कोई ‘त्योहार’ मनाया जाने वाला है!
दिन भर आजादी के,गुणगान गाये जाएंगें
पब्लिक को तरक्की के,नये ढंग बताए जाएंगें
खुशहाली होगी कैसे,ये राग सुनाये जाएंगें
उसका होगा कल्याण कहाँ,वह मार्ग बताए जाएंगें
सच को झूठ,झूठ को सच,सब अपने ढंग से समझाएंगें
इन ब्रह्म ज्ञान सी बातों को,हम आप समझ कहाँ पाएंगें
जय हिन्द-जय हिन्द के चक्कर में,सब घनचक्कर बन जाएंगें
पिसना तो गरीब के भाग्य बदा,सुख का अहसास न होता है
हमें आज तलक न समझ भई,ये 15अगस्त क्या होता है?
जो सोते हैं फुटपाथों पे,जो होते हैं फुटपाथों पे
जो पलते हैं फुटपाथों पे,मरते जीते फुटपाथों पे
घरबार वहीं-संसार वहीं,जिनका सब कुछ फुटपाथों पे
ऊपर है नीला आसमान,नीचे जमीन फुटपाथों पे
इन बेबस-बेघर लोगों से,किसने पूछा क्यूं रोता है?
हमें आज तलक न समझ भई,ये 15अगस्त क्या होता है? |  |
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आजादी,
15 अगस्त
17 टिप्पणियां:
बहुत अच्छी लगी यह पोस्ट...
... बेहतरीन रचना, बधाई !!!
अर्थ की तलाश ही 15 अगस्त को सार्थक बना सकती है.
waah! waah! waah! pandit ji app toh mujhe din pratidin achambhit kiye jaa rahe hain/
aapne toh is kavita ke maadhyam se sach kaa aaina dikhaa diya/
pranam/
waah! waah! waah! pandit ji app toh mujhe din pratidin achambhit kiye jaa rahe hain/
aapne toh is kavita ke maadhyam se sach kaa aaina dikhaa diya/
pranam/
पंडित जी,
बडी सुंदर रचना है, आप भी व्यंग्य बाण चला रहे हैं।:))
तस्वीरें बोलती हैं.
आज की पोस्ट में बहुत सही सवाल किया है..
'१५ अगस्त 'एक रस्म अदायगी रह गया है.
बेहतरीन रचना वत्स साहब!
मोहतरमा अलपना जी नें बिल्कुल दुरुस्त फरमाया कि आज पन्द्रह अगस्त, शहीदी दिवस, 26 जनवरी इत्यादि बस सिर्फ रस्म अदायगी भर रह गई हैं! देश के बारे में सोचने की भला किसे फिक्र है! बहरहाल आपकी कविता बेहद पसन्द आई!
बेहतरीन रचना वत्स साहब!
मोहतरमा अलपना जी नें बिल्कुल दुरुस्त फरमाया कि आज पन्द्रह अगस्त, शहीदी दिवस, 26 जनवरी इत्यादि बस सिर्फ रस्म अदायगी भर रह गई हैं! देश के बारे में सोचने की भला किसे फिक्र है! बहरहाल आपकी कविता बेहद पसन्द आई!
यह आप के दिल के दिल की ही नही हम सब के दिल की आवाज है, लेकिन जो शहीद हुये हमे उन की इज्जत रखनी चाहिये, तो ...स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनाएं। सवीकार करे
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ
सही बात है इस पहलू को भी नकारा नहीं जा सकता
"सच को झूठ,झूठ को सच,सब अपने ढंग से समझाएंगें
इन ब्रह्म ज्ञान सी बातों को,हम आप समझ कहाँ पाएंगें"
कुछ कुछ तो अब हम भी समझने लगे हैं पण्डित जी।
इन ब्रह्म ज्ञान सी बातों को,हम आप समझ कहाँ पाएंगें.....
सत्यता के समावेश लिए बहुत सुंदर रचना
खैर रस्म अदायगी ही सही फिर भी
स्वतंत्रता दिवस की 63 वीं वर्षगांठ
के उपलक्ष में
हार्दिक शुभकामनाएं !
are wah pandit ji aap bhi kavita karne lage...ab ludhiana me kavisammelan jaroor hoga...
बेहद सटीक, स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर हार्दिक अभिनन्दन एवं शुभकामनाएँ.
रामराम.
१५ अगस्त का सही अर्थ तलाशती रचना ... वैसे आजकल एक और छुट्टी के सिवा कुछ नही है १५ अगस्त ...
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