ad

पागल बनाम ब्लागर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
पागल बनाम ब्लागर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 16 अक्तूबर 2010

हो न हो जरूर पागल है वह !!!

वो बस कभी तो यूँ ही बिला वजह बैठा बैठा मुस्कुराने लगता है. कभी उसकी आँखे आकाश में टंगी रहती हैं, कभी एकदम से मुखडा माघ के मेघों की तरह गम्भीर बना लेता है. कान श्वान की भन्ती सजग हो उठते हैं, मानों स्वर्ग से कोई सूचना बेतार के तार से उसके पास आ रही हो. सुना है मुसलमानों के नबी हजरत मोहम्मद साहब के समीप वहिश्त से पैगामात आए करते थे, मगर उन्होने तो कुछ किया भी.ये भला क्या करेगा. बैठा कल्पनाओं में जितनी आनन्दानुभुति लेता है, व्यवहारिकता में उससे सौ गुणे घबडाता हैं.

ऎसे आदमी पागल होते हैं. अगर कोई अपने मतलब से, अपने स्वार्थ से मुस्कुराता है या ख्यालों में खोया है, तो वह ठीक है. कम से कम वह पागल तो हरगिज नहीं है. लेकिन अगर कोई बिला वजह के मुस्कुराता है, तो वह मुस्कुराहट का अपव्यय करता है. इस व्यापारिक युग में अपव्यय सबसे खराब चीज मानी जाती है. सो, मुस्कुराहट का भी अपव्यय नहीं होना चाहिए. जो फिजूल बिना कारण के मुस्कुराता है, बिना किसी मतलब के ख्यालों में खोया रहता है तो वह पागल नहीं तो भला ओर क्या है ?
खाने-पीने का भी उसका कोई हिसाब-किताब नहीं. जो मिला सो खा लिया. नहीं मिला, नहीं खाया. अपनी मौज में चाहे बैठे मुस्कुराते रहे चाहे गम्भीरता का पल्लू ओढ लिया. जरूर ही वह पागल है; वर्ना खाना तो आदमी को समय से तीनों टाईम खाना ही चाहिए. इसी दो वक्त की रोटी के लिए आदमी चोरी, डकैती, घूसघोरी, जालसाजी और तरह तरह की बेईमानियाँ करता फिरता है. इसी भोजन के लिए षडयन्त्र होते हैं, हत्याएं होती हैं, तख्तो ताज पलट दिए जाते हैं. भोजन ही तो जीवन की सार वस्तु है. उस भोजन की ओर से लापरवाह ? उस भोजन के बिना भी अलमस्त ? वह जरूर पागल है. यदि वह पागल नहीं होता तो भूख लगने पर समय से खाना तो खाता. लेकिन नहीं चाहे कितनी भी जोरदार भूख लगी हो, वो अकेले बैठे कभी मुस्कुराता रहता है, तो कभी किसी सोच में डूबा दिखाई देता है. जरूर वह पागल है !

मैं शाम-सवेरे, दिन-दोपहर उसे बराबर देखता रहता हूँ. वह हमेशा यूँ ही कभी मुस्कुराता मिलता है तो कभी किसी सोच में डूबा हुआ. मेरे ही घर में रहता है. हालाँकि वो हमारे परिवार का कोई सदस्य नहीं है, इसलिए ये भी नहीं कह सकता कि वो हमारा कोई अपना है. अब उसे पारिवारिक सदस्य भी कैसे कहूँ ? मगर वह मेरे ही साथ रहता है.
न जाने कौन है वो ?........
लोग कहते हैं कि वो "ब्लागर" है...लेकिन न जाने मुझे ऎसा क्यों लगता है कि वो जरूर कोई पागल है.
हाँ शायद " पागल " ही है वो........