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गुरुवार, 11 मार्च 2010

इन्साफ की दिशा में अन्याय हो रहा है.............

इन्साफ की दिशा में अन्याय हो रहा है
आरम्भ किस विद्या का अध्याय हो रहा है।।

सोना बता रहे हैं शब्दों को सब हमारे
मिट्टी मगर हमारा अभिप्राय हो रहा है।।

आदेश बन रहा है अपशब्द भी किसी का
औ राय रख के कोई बे-राय हो रहा है ।।

शोषण अवैध घोषित है, जिस जगह वहीं पर
शोषित जनों का अपना समुदाय हो रहा है।।

इन्साफ की दिशा में अन्याय हो रहा है
आरम्भ किस विद्या का अध्याय हो रहा है।।

ना मालूम कब,कहाँ ये गजल/कविता पढी थी या किसी से सुनी थी। लेकिन मस्तिष्क पटल पर उसकी कुछ पंक्तियाँ अब तक अंकित हैं। आज पता नहीं क्यों, किसी की पोस्ट को पढते हुए ये पंक्तियाँ अनायास ही दिमाग में गूंजने लगी तो मन किया कि इसे ब्लाग पर पोस्ट किया जाए। अगर किसी को इस कविता/गजल के रचनाकार के बारे में पता हो तो अवश्य बताएं...............