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शनिवार, 14 अगस्त 2010

ये 15 अगस्त क्या होता है ???

सुना है! कल 15 अगस्त नाम का कोई ‘त्योहार’ मनाया जाने वाला है!

दिन भर आजादी के,गुणगान गाये जाएंगें
पब्लिक को तरक्की के,नये ढंग बताए जाएंगें
खुशहाली होगी कैसे,ये राग सुनाये जाएंगें
उसका होगा कल्याण कहाँ,वह मार्ग बताए जाएंगें
सच को झूठ,झूठ को सच,सब अपने ढंग से समझाएंगें
इन ब्रह्म ज्ञान सी बातों को,हम आप समझ कहाँ पाएंगें
जय हिन्द-जय हिन्द के चक्कर में,सब घनचक्कर बन जाएंगें
पिसना तो गरीब के भाग्य बदा,सुख का अहसास न होता है
हमें आज तलक न समझ भई,ये 15अगस्त क्या होता है?


जो सोते हैं फुटपाथों पे,जो होते हैं फुटपाथों पे
जो पलते हैं फुटपाथों पे,मरते जीते फुटपाथों पे
घरबार वहीं-संसार वहीं,जिनका सब कुछ फुटपाथों पे
ऊपर है नीला आसमान,नीचे जमीन फुटपाथों पे
इन बेबस-बेघर लोगों से,किसने पूछा क्यूं रोता है?
हमें आज तलक न समझ भई,ये 15अगस्त क्या होता है?
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शनिवार, 20 फ़रवरी 2010

कुछ ऎसे सवाल जिनका जवाब खोजना बहुत जरूरी सा लगने लगा है!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

जन्मसंख्या की दृ्ष्टि से दुनिया का सबसे बडा लोकतन्त्र देश-----भारत। जहाँ संसार के हर धर्म को मानने वाला शख्स मिलेगा। जहाँ आधुनिकता की चरम सीमा तक पहुँच चुके धन कुबेरों की कमी नहीं तो दूसरी ओर अनादिकाल से चले आ रहे आदिवासी भी साथ साथ ही पल रहे हैं। सुनने में आता है कि देश की आजादी के बाद के शुरूआती समय में ये कहा जाता था कि जातिभेद और धर्मभेद के कारण और अविकसित राष्ट्रीयता के चलते ये देश आने वाले 5-10 सालों में ही या तो अपनी आजादी गँवा बैठेगा या फिर टुकडों में बँटकर पूरी तरह से छिन्न भिन्न हो चुका होगा। लेकिन तब से लेकर आज तक पाकिस्तान और चीन जैसे पडोसियों के प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से चलाए जा रहे युद्धों को झेलते हुए भी ये देश हर कसौटी पर खरा उतरता रहा। आज भी यहाँ लोकतन्त्र प्रणाली कायम है, भले ही वह औपचारिक, लुंज-पुंज एवं त्रुटियों का भंडार ही क्यों न बन चुकी हो।

लेकिन इन बडी बडी उपलब्धियों के बावजूद, देश की विशालता एवं विविधता के बाद भी आज एक आम भारतीय पूरी तरह से हताश और निराश है। आजादी के समय के सारे प्रश्न आज भी ज्यों के त्यों खडे हैं, उलटा समाज का नैतिक ह्रास होता हुआ ही दिख रहा है। ऎसा लग रहा है कि मानो हम लोग किसी उल्टी दिशा की ओर बढते चले जा रहे हैं। जिधर देखो उधर संकंट ही संकट क्यों दिखाई पड रहा है। मोर्चा नागरिक अधिकारों का हो कि जनसंख्या वृ्द्धि का,गरीबी-बेरोजगारी घटाने का हो कि भ्रष्टाचार का, शिक्षा की समस्या लीजिए या नशाखोरी की,मँहगाई का सवाल हो कि अराजकता का, महिलाओं की दशा लीजिए या एक आम आदमी की सुरक्षा के हालातों पर दृ्ष्टि डालिए------इस देश में चारों तरफ संकंट ही संकंट क्यों दिखाई दे रहा है?
आज इन सवालों को समझना और इनके जवाब खोजना बहुत जरूरी हो गया है। इस देश के कर्णधारों के पास तो इन सवालों का कोई जवाब नहीं, सोचा कि शायद आप लोगों में से किसी के पास इन सवालों का कोई जवाब हो............