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शनिवार, 11 दिसंबर 2010

बेचारा !

हाथी की विशालता देख-देख मच्छरों का झुंड हँसे जा रहा है----"अरे देखो कितना भारी शरीर है. कैसी बेढब शक्ल-सूरत है. खूबसूरती तो है ही नहीं. न ही कोई गुण है. हमें तो दया आती है इसे देख कर ! हमारी तरह जरा इधर-उधर उड भी नहीं पाता बेचारा !"
सोचता हूँ,  सचमुच आज के जमाने में मच्छरों से बढकर संसार में भला ओर कौन गुणी है ? निस्सन्देह परमेश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना मच्छर ही है!

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