ad

हंसी-मजाक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
हंसी-मजाक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 25 जून 2009

चन्द लतीफे..........

 तन्दरूस्ती का राज
हाल ही में हमारे पड़ोस में एक बूढ़े सज्जन रहने को आये । काफी खुशमिजाज और जवांदिल लगते थे।

एक दिन मैंने उनसे पूछा - आप उम्र के लिहाज से काफी तन्दुरुस्त और खुश दिखते हैं । आपके सुखी जीवन का राज क्या है ?

- मैं रोज तीन पैकेट सिगरेट पीता हूं । शाम को व्हिस्की का अध्दा और बढ़िया मसालेदार खाना खाता हूं। और हां, व्यायाम तो मैं कभी नहीं करता।

- कमाल है । मैं आश्चर्य से भर गया।
मैंने फिर पूछा - वैसे आपकी उम्र क्या होगी ?

- छब्बीस साल ।
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------
फिजूल खर्ची
एक जापानी महिला अपनी सहेली के साथ सिंगापुर की सड़कों से गुजर रही थी। तभी एक महिला ने अपने प्रेमी को खिड़की के बाहर धक्का दिया जो नीचे रखे कूड़ेदान में जा गिरा।

यह देखकर जापानी महिला ने अपनी सहेली से कहा - ये सिंगापुरी महिलाएं बहुत फिजूलखर्च होती हैं।

- वो कैसे ? सहेली ने पूछा ।

- अब देखो न ! यह आदमी अभी और चार-पांच साल इसके काम आ सकता था।
---------------------------------------------------------------------------------------------------------------
तरक्की की सीढी
बॉस ने अपने एक कर्मचारी को ऑफिस में बुलाया और कहा - मि. गोपाल, तुमने एक साल पहले यह कंपनी बतौर क्लर्क ज्वाइन की थी। चार महीने के भीतर ही तुम्हारा प्रमोशन मैनेजर के पद पर हो गया। उसके चार महीने बाद तुम कंपनी के वाइस-चेयरमेन पद तक पहुंच गए। मेरे विचार से अब समय आ गया है कि तुम इस कंपनी का पूरा भार ग्रहण कर लो और मैं रिटायरमेंट ले लूं।

- जी । कर्मचारी ने कहा।

- तुम इस संबंध में कुछ कहना चाहते हो।

- जी हां। मैं आपको थैंक्यू कहना चाहता हूं।

- बस सिर्फ थैंक्यू ? और कुछ नहीं कहना ।

- ओह सॉरी ! थैंक्यू पापा ........ !
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------
त्रासदी
एक मंत्रीजी एक स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे । बच्चों से बातचीत के दौरान उन्होंने पूछा कि क्या कोई बच्चा त्रासदी को उदाहरण देकर समझा सकता है।

एक छोटे बच्चा खड़ा हुआ और बोला - यदि किसी बच्चे को सड़क पार करते समय कोई कार कुचल दे तो यह एक त्रासदी होगी।

- नहीं बेटे .... । मंत्री जी ने टोका - यह तो एक दुर्घटना कही जाएगी।

एक दूसरे बच्चे ने बताया - यदि कोई स्कूल बस पुल से गिर जाए और उसमें बैठे सभी लोग मारे जाएं तो यह एक त्रासदी होगी।

- नहीं ... नहीं ... । मंत्री जी ने कहा - यह त्रासदी नहीं बल्कि एक बहुत बड़ी अपूरणीय क्षति कही जाएगी।

- क्या और कोई बच्चा बता सकता है ? मंत्रीजी ने बच्चों से पूछा ।

आखिरकार एक बच्चा उठा और बोला - यदि आप अपने परिवार सहित एक हेलीकॉप्टर में जा रहे हों और आतंकवादी उसे बम से उड़ा दें तो यह एक त्रासदी होगी।

- शाबाश ! बहुत बढ़िया उदाहरण है । अच्छा बेटे, क्या तुम समझा सकते हो कि तुम इसे त्रासदी क्यों कह सकते हो ? मंत्रीजी ने खुश होते हुए पूछा ।

बच्चे ने समझाया - देखिए, यह दुर्घटना तो कही नहीं जा सकती और बहुत बड़ी क्षति तो कैसे भी नहीं ............ !
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------

गुरुवार, 23 अप्रैल 2009

बस यूं हीं----------- चन्द उधार के चुटकुले

बहुत दिनों से या तो कुछ लिखने का ही मन नहीं कर रहा था।या फिर अगर मन मारकर लिखने भी बैठा तो  गम्भीर विषय ही सूझा। इसलिए  पिछली दो चार पोस्टें गंभीर सामाजिक विषयों पर ही लिखी गई। अचानक आज पुरानी ईमेल चैक कर रहा था तो उनमे एक मेल दिखाई दी,जिसके जरिए किसी अंजान शख्स नें ढेर सारे चुटकुले भेजे हुए थे। पढने पर बढिया लगे तो सोचा कि क्यूं न आप लोगों के साथ बांट कर मूड को थोडा हल्का कर लिया जाए। तो फिर लीजिए, उन्ही मे से चन्द उधार के चुटकुले झेलिए और हमारे साथ आप भी थोडा सा मुस्कुरा लीजिए.:-----
......................................................................................................................................................................
                                             चोर की इन्सानियत
एक चोर एक घर में चोरी करने गया। तिजोरी पर लिखा था - तिजोरी को तोड़ने की जरूरत नहीं है। 123 नंबर लंगाकर सामने वाला लाल बटन दबाओ, तिजोरी खुल जाएगी।

जैसे ही चोर ने बटन दबाया, अलार्म बजने लगा और पुलिस आ गई।

जाते-जाते चोर ने घर के मालिक से कहा -----"लानत है तुम पर! आज तुम्हारे कारण मेरा इंसानियत से विश्वास उठ गया है ".....
....................................................................................................................................................................
                                            स्त्री की कर्तव्यनिष्ठा
इंटेलिजेंस ब्यूरो में एक उच्च पद हेतु भर्ती की प्रक्रिया चल रही थी। अंतिम तौर पर केवल तीन उम्मीदवार बचे थे जिनमें से किसी एक का चयन किया जाना था। इनमें दो पुरुष थे और एक महिला।
फाइनल परीक्षा के रूप में कर्तव्य के प्रति उनकी निष्ठा की जांच की जानी थी। पहले आदमी को एक कमरे में ले जाकर परीक्षक ने कहा - ''हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि तुम हर हाल में हमारे निर्देशों का पालन करोगे चाहे कोई भी परिस्थिति क्यों न हो।'' फिर उसने उसके हाथ में एक बंदूक पकड़ाई और दूसरे कमरे की ओर इशारा करते हुये कहा - ''उस कमरे में तुम्हारी पत्नी बैठी है। जाओ और उसे गोली मार दो।''
''मैं अपनी पत्नी को किसी भी हालत में गोली नहीं मार सकता''- आदमी ने कहा।
''तो फिर तुम हमारे किसी काम के नहीं हो। तुम जा सकते हो।'' - परीक्षक ने कहा।

अब दूसरे आदमी को बुलाया गया। ''हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि तुम हर हाल में हमारे निर्देशों का पालन करोगे चाहे कोई भी परिस्थिति क्यों न हो।'' कहकर परीक्षक ने उसके हाथ में एक बंदूक पकड़ाई और दूसरे कमरे की ओर इशारा करते हुये कहा - ''उस कमरे में तुम्हारी पत्नी बैठी है। जाओ और उसे गोली मार दो।'' आदमी उस कमरे में गया और पांच मिनट बाद आंखों में आंसू लिये वापस आ गया। ''मैं अपनी प्यारी पत्नी को गोली नहीं मार सका। मुझे माफ कर दीजिये। मैं इस पद के योग्य नहीं हूं।''

अब अंतिम उम्मीदवार के रूप में केवल महिला बची थी। उन्होंने उसे भी बंदूक पकड़ाई और उसी कमरे की तरफ इशारा करते हुये कहा - ''हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि तुम हर हाल में हमारे निर्देशों का पालन करोगी चाहे कोई भी परिस्थिति क्यों न हो। उस कमरे में तुम्हारा पति बैठा है। जाओ और जाकर उसे गोली से उड़ा दो।'' महिला ने बंदूक ली और कमरे के अंदर चली गई। कमरे के अंदर घुसते ही फायरिंग की आवाजें आने लगीं । लगभग 11 राउंड फायर के बाद कमरे से चीखपुकार, उठापटक की आवाजें आनी शुरू हो गईं। यह क्रम लगभग पन्द्रह मिनटों तक चला उसके बाद खामोशी छा गई।
लगभग पांच मिनट बाद कमरे का दरवाजा खुला और माथे से पसीना पोंछते हुये महिला बाहर आई। बोली - ''तुम लोगों ने मुझे बताया नहीं कि बंदूक में कारतूस नकली हैं। मजबूरन मुझे उसे पीट-पीट कर मारना पड़ा।''
....................................................................................................................................................................
                                            सस्ता समाधान
एक आदमी मनोचिकित्सक के पास गया । बोला -''डॉक्टर साहब मैं बहुत परेशान हूं। जब भी मैं बिस्तर पर लेटता हूं, मुझे लगता है कि बिस्तर के नीचे कोई है। जब मैं बिस्तर के नीचे देखने जाता हूं तो लगता है कि बिस्तर के ऊपर कोई है। नीचे, ऊपर, नीचे, ऊपर यही करता रहता हूं। सो नहीं पाता । कृपा कर मेरा इलाज कीजिये नहीं तो मैं पागल हो जाऊंगा।''
डॉक्टर ने कहा - ''तुम्हारा इलाज लगभग दो साल तक चलेगा। तुम्हें सप्ताह में तीन बार आना पड़ेगा। अगर तुमने मेरा इलाज मेरे बताये अनुसार लिया तो तुम बिलकुल ठीक हो जाओगे।''
मरीज - ''पर डॉक्टर साहब, आपकी फीस कितनी होगी ?''
डॉक्टर - ''सौ रूपये प्रति मुलाकात''
गरीब आदमी था। फिर आने को कहकर चला गया।
लगभग छ: महीने बाद वही आदमी डॉक्टर को सड़क पर घूमते हुये मिला ।
''क्यों भाई, तुम फिर अपना इलाज कराने क्यों नहीं आये ?'' मनोचिकित्सक ने पूछा।
''सौ रूपये प्रति मुलाकात में इलाज करवाऊं ? मेरे पड़ोसी ने मेरा इलाज सिर्फ बीस रूपये में कर दिया'' आदमी ने जवाब दिया।
''अच्छा! वो कैसे ?''
''दरअसल वह एक बढ़ई है। उसने मेरे पलंग के चारों पाए सिर्फ पांच रूपये पाए के हिसाब से काट दिये।''
...................................................................................................................................................................
                                          विज्ञान का अन्तिम सत्य
एक जीवविज्ञानी मेंढ़कों के व्यवहार का अध्ययन कर रहा था। वह अपनी प्रयोगशाला में एक मेंढ़क लाया, उसे फर्श पर रखा और बोला - ''चलो कूदो !'' मेंढ़क उछला और कमरे के दूसरे कोने में पहुंच गया। वैज्ञानिक ने दूरी नापकर अपनी नोटबुक में लिखा - ''मेंढ़क चार टांगों के साथ आठ फीट तक उछलता है।''
फिर उसने मेंढ़क की अगली दो टांगें काट दी और बोला - ''चलो कूदो, चलो !'' मेंढ़क अपने स्थान से उचटकर थोड़ी दूर पर जा गिरा। वैज्ञानिक ने अपनी नोटबुक में लिखा - ''मेंढ़क दो टांगों के साथ तीन फीट तक उछलता है।''
इसके बाद वैज्ञानिक ने मेंढ़क की पीछे की भी दोनों टांगे काट दीं और मेंढ़क से बोला - ''चलो कूदो!''
मेंढ़क अपनी जगह पड़ा था। वैज्ञानिक ने फिर कहा - ''कूदो! कूदो! चलो कूदो!'' पर मेंढ़क टस से मस नहीं हुआ।
वैज्ञानिक ने बार बार आदेश दिया पर मेंढ़क जैसा पड़ा था वैसा ही पड़ा रहा ।
वैज्ञानिक ने अपनी नोटबुक में अंतिम निष्कर्ष लिखा - ''चारों टांगें काटने के बाद मेंढ़क बहरा हो जाता है।''
..................................................................................................................................................................