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शुक्रवार, 17 सितंबर 2010

ब्लागर एकता जिन्दाबाद….."जिन्दाबाद-जिन्दाबाद”


सचमुच लोगों का भी कोई हाल नहीं है.देखिए अन्तर्र्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन हो गया, जिसमें हिन्दी ब्लागर संगठन बनाने जैसा कितना शानदार च जानदार सुझाव भी दे दिया गया, जिसका कि अधिकतर भई लोग समर्थन भी कर चुके हैं, लेकिन इत्ते दिन बीतने के बाद भी अभी तक इस सुझाव को असली जामा ही नहीं पहनाया जा रहा. लोग-बाग कितने जाहिल और नाकारा हो गये हैं. मजे ले लेकर बातें खूब करते हैं, पढते हैं, वाह वाह करते हैं लेकिन ब्लागर संगठन की शुरूआत करने की जहमत कोई नहीं उठाना चाहता. भला क्यों ?
अरे भाई!एक विचार नें जन्म लिया है और आप ही लोग उसका भरपूर समर्थन भी कर रहे है तो फिर काहे नहीं उस विचार को मूर्तरूप दे रहे.भाई यह कोई गैरकानूनी काम तो है नहीं कि डरा जाए.मेरे विचार से भारतीय कानून में ऎसी कोई धारा भी नहीं है कि कोई संगठन खडा करने पर किसी दंड का प्रावधान हो,ओर न ही इसमें गूगल-वूगल या चिट्ठाजगत वगैरह किसी को भी कोई ऎतराज होना चाहिए,तो फिर अभी तक ऎसा कोई संगठन खडा क्यों नहीं किया जा सका. अरे भाई! सिर्फ सोचने भर से कुछ नहीं हुआ करता. खाली-पीली बौद्धिक-वैचारिक जुगाली से यदि यक्ष प्रश्नों का हल हुआ करता तो अब तक इस हिन्दी ब्लागजगत का क्या पूरे देश का कायापलट न हो चुका होता.
हमें इस ब्लागिंग के अखाडे में आए हुए शायद दो बरस के करीब हो चुके हैं,लेकिन सोच रहे हैं कि इस तरफ अब तक हमारा ध्यान क्यूं नहीं गया.वैसे हमें याद आ रहा है कि बहुत पहले ताऊ द्वारा जब हमारा साक्षात्कार लिया गया था,उस समय ऎसे ही एक विचार नें हमारे मन में भी जन्म लिया था..लेकिन वो सिर्फ एक विचार भर था...एक ऎसा विचार जिसका जन्म शब्दों के इस अनन्त ब्राह्मंड में किसी क्षूद्र तारे की भान्ती सिर्फ नष्ट होने के लिए ही हुआ था.उसके बाद से हमने नहीं देखा कि यहाँ पुन:उस विचार को किसी नें जन्म दिया हो...मैं समझ नहीं पा रहा कि अब तक किसी द्वारा इस विषय पर गौर क्यूं नहीं किया गया ?न्यूटन से पहले पेड से फल गिरने पर भी किसी नें गौर नहीं किया था. आदिकाल से फल पेडों से जमीन पर ही तो गिर रहे थे,लेकिन किसी का उस तरफ ध्यान नहीं गया....मानो संसार जन्म-जन्मांतर से न्यूटन का ही इन्तजार कर रहा था कि कब वो आएं ओर पेड से फल गिरते देखकर दुनिया को गुरूत्वाकर्षण का सिद्धान्त दें........
चलिए आगे बढने से पहले एक बात कहना चाहते हैं,कि भईया हम अगर किसी से बडे नहीं तो छोटे भी हरगिज नहीं हैं.बस आप हमें अपने समकक्ष ही समझ लीजिए. सो, उस लिहाज से हम एक मशविरा देना चाह रहे है. वैसे भी दुनिया में कौन किसी को डालर,पौंड दे रहा है,ले देकर सबके पास ये एक मशविरा ही तो हैं बाँटने के लिए. तो हम ये कह रहे थे कि संगठन खडा करने में ही बुद्धिमानी है और अब इसमें तनिक भी देर नहीं करनी चाहिए.लेकिन एक छोटी सी शंका मन में जन्म ले रही है----वो ये कि संगठन बनने के बाद में चर्चा होगी कि प्रधान पद का चुनाव कैसे हो. प्रधान कौन बने? इस पर मतभेद होंगें.विद्वान लोग खेमों में बटेंगें.आपस में कीचड उछालेंगें. वाद विवाद होगा.इन सबसे अच्छा है कि प्रधान पद के लिए पहले से ही ऎसे किसी ब्लागर का चुनाव कर लिया जाए जो कि बृ्हस्पति के सदृ्श विद्वान,शुक्राचार्य की तरह चतुर,सनकादिक के जैसे मायाहीन, चाणक्य की तरह कूटनीतिज्ञ और भूमी के जैसे सहनशील हो----जिससे कि इस मंच को एक सुदृ्ड आधार प्रदान किया जा सके और कल को यह मुद्दा आपसी नौंक-झौंक, सिर फुटौव्वल का विषय न बन सके. (वैसे कुछ लोग ये भी कह सकते हैं कि यदि ऎसा कोई व्यक्ति आज की दुनिया में होता तो यहाँ ब्लागिंग में क्या वो झक मारने के लिए आता:))
खैर जो भी है,इसे सिर्फ हमारा सुझाव ही माना जाए, उस पर अमल करना न करना आप लोगों की मर्जी पर है.लेकिन इतना जरूर कहे देते है कि ये ऎसा सुझाव हैं,जिसमें प्रतिवाद की कोई गुंजाईश ही नहीं है......सो,हमारे विचार से तो इसे तुरन्त स्वीकार कर लिया जाना चाहिए.
writers_block वैसे हमारे पास संगठन की रूपरेखा के बारे में भी एक सुझाव है,चलिए वो भी बताए देते हैं,तनिक ध्यान से पढिए.....तो हमारे विचार से इस संगठन में कुछ अलग अलग विभाग/समूह भी बनाए जाने चाहिए......जैसे कि सरकार में होता है रेलवे विभाग, बिजली विभाग, दूरसंचार विभाग वगैरह वगैरह. वैसे ही यहाँ भी कुछ विभाग या फिर छोटे छोटे उपसंगठन बनाए जाने चाहिए,जिनके अपने अपने अध्यक्ष हों,जो कि अपने अपने समूह की जिम्मेदारी संभालें.......ओर वें सभी समूहाध्यक्ष आगे संगठन संचालक के प्रति जवाबदेय हों.मसलन एक उपसंगठन खडा किया जाए "दंगेच्छु हिन्दी ब्लागर्स संगठन" नाम से, जिसका कार्य हिन्दुस्तान के तमाम फसादी, दंगेच्छु, धर्मांध, उठाईगिरे ब्लागर्स को एक साथ एक मंच पर लाना हो.अगर कहीं इस समूह का कोई सदस्य कभी किसी दंगे-फसाद मे पकडा जाए,किसी चोरी चकारी,धोखाधडी के केस मे पुलिस अन्दर कर दे तो समूह के सभी सदस्य एक जगह इकठा हो कर पुलिस के खिलाफ हाय! हाय! मुर्दाबाद! के नारे लगाकर या पुतले फूँक अभियान चलाकर कानून पर सामूहिक दबाव बनाएं ताकि उस "हिन्दी सेवी ब्लागर"को कानून के क्रूर पंजों से मुक्त कराया जा सके.ब्लागर एकता जिन्दाबाद्!
ऎसे ही कुछेक ओर समूह बनाए जा सकते हैं,जैसे कि "राष्ट्रीय सरकारी कर्मचारी ब्लागर्स संगठन"जिसका कार्य होगा समय समय पर संसद भवन के सामने सरकार के विरूद्ध नारे लगाना,ताकि सरकार को विवश किया जा सके कि वो "रिश्वत लेने" को कानूनन वैध घोषित करे.साथ ही सरकारी कर्मचरियों के कार्यकाल में आने वाली अन्य विभिन्न प्रकार की दिक्कत,परेशानियों को दूर करने हेतु कुछ सामूहिक प्रयास भी समय समय पर किए जाते रहें.
"सम्मान जुटाऊ ब्लागर्स संगठन".इस समूह का कार्य होगा कि जब भी संगठन के किसी सदस्य के यहाँ कोई प्रभात फेरी, जागरण, कथा कीर्तन या फिर कोई जलूस वगैरह निकालने का प्रोग्राम हो तो ब्लागर्स की भीड जुटाकर अपने मोहल्ले,शहर के लोगों के सामने अपनी पहचान के झंडे गाडें जा सकें. अडोसी-पडोसी, नाते-रिश्तेदार भी देखकर दंग रह जाएं कि बन्दे का कितना भारी रसूख है.कितनी दूर दूर तक इनकी जान पहचान है........
हाँ तो भाईयो!अब हमने तो अपने सुझाव आप लोगों के सामने रख दिए.......वैसे सुझाव तो हमारे पास ओर भी बहुत सारे हैं,बिल्कुल थोक के भाव.लेकिन अभी इतने से ही काम चला लीजिए.पहले तो ये देखना बाकी हैं कि आप लोग इन सुझावों को असली जामा पहनाते भी हैं कि नहीं....खैर, हमरा काम तो था मशविरा देना,मानना न मानना आप की मर्जी......राम जी भली करें.बोलिए--"ब्लागर एकता जिन्दाबाद":)

ज्ञानवाणी:-बाबा लीडरानन्द जी कह गए हैं कि दुनिया को बदलने की बडी बडी बातें करने वाले, लम्बी-लम्बी हाँकने वाले यदि पहले खुद में बदलाव ला सकें तो शायद ये दुनिया खुद-ब-खुद बदल जाए.......बिना किसी संगठन के !!!